Saṃskṛta-nāṭaka - Harṣavardhana (Part 7) - Nāgānanda
In this way, the poet has pictured dāna-vīra rooted in dayā; śṛṅgāra, hāsya, karuṇa, and adbhuta rasas are secondary in the play. In other words, they become th...
In this way, the poet has pictured dāna-vīra rooted in dayā; śṛṅgāra, hāsya, karuṇa, and adbhuta rasas are secondary in the play. In other words, they become th...
अनेक अवसरों पर जब मुस्लिम सेना का पाशविक कृत्य अपने चरम पर था, भारत भूमि में साहसी वीर निरंतर रूप से होते रहे। एक मुस्लिम लेखाकार अल इद्रिसी कहता है – “भारतीय...
३. अलङ्कारसुधानिधेः स्वरूपं तत्कर्तृत्वं च यदा हि उपात्तविद्यो द्वितीयः सङ्गमः स्वयं राज्यधुराम् अवोढ तदा सारस्वतानि कार्याणि निर्वर्तयितुं सायणाचार्येण पर्याप...
Some wonder why and how Harṣa was inspired to write a story connected with the bodhi-sattva; it is not difficult to surmise a possibility. Though there is some...
जिस समय सीमाक्षेत्र पर गुर्जर प्रतिहार के लोग, अरब देश के व्यापारियों द्वारा किये जा रहे अन्याय के विरुद्ध स्थानीय व्यापारियों के हित में अनवरत रूप से लड रहे थे...
२. रचयिता २.१. अन्वयो गुरवश्च सायणाचार्यः कर्णाटमध्यूषुषोः विप्रदम्पत्योः श्रीमती-मायणयोः पुत्रत्वेन जज्ञे। स हि कुलधनमिव बिभ्राणः श्रौतं तेजः गोत्रेण भारद्वा...
There is nothing special in the characterisation in the Ratnāvalī and Priyadarśikā; the characters are well known through the works of Bhāsa and Kālidāsa; their...
महाभारत में दुर्योधन वध के पूर्व श्री कृष्ण युधिष्ठिर को समझाते है कि युद्ध में कपटी, चालाक तथा दुष्ट दुश्मन को उसी के तौर तरीकों से हराना आवश्यक हो जाता है[1]।...
अलङ्कारसुधानिधिः श्रौत्रार्हन्तीचणेन वेदभाष्यकृता तत्रभवता श्रीसायणाचार्येण विरचितो ग्रन्थः। काव्यमीमांसां विशदयतानेन कारिका-वृत्ति-उदाहरणपद्यात्मकः साम्प्रदायि...
Kathā-sarit-sāgara was composed in the eleventh century CE (between 1063 and 1081 CE) based on the Bṛhatkathā, which was in paiśācī prākṛta; the Bṛhatkathā-mañj...
जब तक भोज जीवित रहा, गजनी कुछ विशेष प्राप्त कर पाने में सफल नहीं हो सका किंतु भोज को अनेक सनातन धर्मियों ने ही मिलकर युद्ध भूमि में मार दिया। महमूद गजनी के बार...
ನೈಷಧೀಯಚರಿತವು ಸಂಸ್ಕೃತಸಾಹಿತ್ಯದ ವಿದ್ವತ್ತೆಯ, ವಿದ್ಯಾಸ್ಪರ್ಧೆಯ, ಚಮತ್ಕಾರಪಾರಮ್ಯದ ಯುಗದ ಅಪ್ರತಿಮ ಪ್ರತಿನಿಧಿ. ವ್ಯಾಸ-ವಾಲ್ಮೀಕಿಗಳ ಮಹಾಕೃತಿಗಳಲ್ಲಿ ಕಂಡುಬರುವ ಕಥೆ-ಪಾತ್ರಗಳ ಆಳ-ಅಗಲಗಳನ್ನಾ...