भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 105
रुद्रवर्मा, भववर्मा, महेंद्र, ईशान और जयवर्मा सहित राजाओं की एक लंबी सूची ने इस देश पर शासन किया। उनके शासनकाल के दौरान लिखे गए सैकड़ों संस्कृत शिलालेख आज भी मौ...
Prof. Dharmaraj Singh Vaghela served as the Head of the Department of Physics at the Government Arts and Science College, Ratlam of the MP Govt. Higher Education Department, until his retirement in 2004. He has published a number of papers in Plasma Physics in international journals. His papers have also appeared in the research journal of the Hindi Science Academy. Among other books, he has translated Fritjof Capra's best-selling work "The Tao of Physics" into Hindi. He has written a monograph in Hindi which explains the philosophical aspects of modern physics.
रुद्रवर्मा, भववर्मा, महेंद्र, ईशान और जयवर्मा सहित राजाओं की एक लंबी सूची ने इस देश पर शासन किया। उनके शासनकाल के दौरान लिखे गए सैकड़ों संस्कृत शिलालेख आज भी मौ...
बृहद्भारत में क्षात्र की विरासत[1] भारतवर्ष के बाहर क्षात्र की हिंदू परंपरा की विरासत को उसके विभिन्न रूपों में देखा जा सकता है। यह विरासत ईसाई धर्म, इस्लाम और...
कश्मीर कश्मीर अपने आप में भारतवर्ष की सांस्कृतिक गाथा में एक गौरवशाली अध्याय है। इस्लाम ने कश्मीर की अभिन्न सांस्कृतिक विरासत को कितनी क्रूरता से नष्ट कर दिया,...
हिंदू परंपरा के क्षात्र के अन्य आयाम इस साधारण सी किताब के दायरे में क्षात्र की हिंदू परंपरा का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी राजवंशों और महान योद्धाओं की सूची दे...
बख्तियार खिलजी, जिसने नालंदा, विक्रमशिला, और ओदंतपुरी जैसे विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया और अनगिनत बौद्ध विहारों को नष्ट कर दिया, उसने सेन शासकों में आतंक भर...
मूलस्थान में विभिन्न हिंदू संप्रदायों के शासक वर्ग और धार्मिक प्रमुख निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहे: पहली प्राथमिकता दुश्मन का वध और निष्कासन थी। इसमें, एक...
643 ईस्वी की शुरुआत से ही, अरबों ने सिंध में देबल बंदरगाह पर कई बार हमला करने की कोशिश की, जिसका परिणाम भी वैसा ही रहा। हर बार हिंदू राजाओं के हाथों मुस्लिम सैन...
भारत की योद्धा भावना द्वारा इस्लामी आक्रमण के विरुद्ध प्रतिरोध जब हम अपनी इतिहास की पाठ्यपुस्तकें पढ़ते हैं, तो हमें लगता है कि हिंदू इस्लामी हमलों के सामने हत...
यहां भी दो प्रकार की समस्याए उपस्थित होती है – जब राज्य छोटा होता है तो बाह्य आक्रमण का भय बढ़ जाता है और यदि साम्राज्य अति विस्तृत है तो आंतरिक शत्रुओं से निपट...
यह दुःख का विषय है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत हमारे राजनेताओं में अधिकांशतः क्षात्र भाव का अभाव देखने में आता है। भारत के लम्बे इतिहास में क्षात्र चेतना...
सारांश रूप में अहिल्याबाई के रूप में हम हजार वर्षों के मुस्लिम अत्याचारों के विपरीत एक अत्यंत उदात्त हिंदू चरित्र को देखते है। अहिल्याबाई और सवाई जयसिंह दोनो ने...
अहिल्याबाई ने अपने कोषालय का हमेशा परिपूर्ण रखा उसके शासन काल में मालवा क्षेत्र अति समृद्ध प्रांत था। अपने प्रजाजनों के कल्याण के अतिरिक्त उसने कभी भी एक रुपये...
अहिल्याबाई का जन्म औरंगाबाद के निकट एक गॉव चॉडी में मानकोजी पटेल के घर हुआ था। यद्यपि आज के सन्दर्भ में उनका संबंध पिछड़े वर्ग से था तथापि उनमें अति उच्च संस्का...
प्रारम्भ से ही वह मुस्लिम बादशाहों की गतिविधियों नियमों, उनके धार्मिक विश्वास, अन्याय, असहशीलता तथा अविश्वसनीय व्यवहार को देखता आया था जो अवगुण उन्हे इस्लाम के...
औरंगजेब की मृत्यु के बाद मराठा, राजपूत, सिख और शक्ति संपन्न हो गये। सनातन धर्म का पुनर्जागरण होने लगा। नादिरशाह सतत रुप से दिल्ली के कमजोर शासको को इस स्थिति की...
पंद्रहवीं शताब्दी में शेख निजामुद्दीन औलिया लिखते है कि इस्लाम के धर्मोपदेश से हिंदुओं के विचारों को नहीं बदला जा सकता है। निम्नतम स्तर के लोगों को भी अपनी जाति...
मराठों का वर्चस्व शिवाजी के मरणोपरांत उनके पुत्र और पौत्रों ने मुगलों का कुछ सीमा तक विरोध किया था। वस्तुतः जो वास्तविक कार्य था वह शिवाजी की प्रेरणा से युक्त...
शिवाजी का अंतिम समय दुर्भाग्य से शिवाजी के उत्तराधिकारी उतने सक्षम शासक नहीं थे[1]। उनका पुत्र संभाजी अयोग्य था। अपने पिता की मृत्यु के समय संभाजी की आयु बाईस...
शिवाजी की विजय शिवाजी की पहली बडी विजय अफजल खान के विरुद्ध हुई थी। बीजापुर के सुल्तान ने अफजल खान को शिवाजी का वध करने भेजा था, वह प्रतापगढ़ के किले के समीप अप...
छत्रपति शिवाजी :- हिंदू धर्म के पथ प्रदर्शक दक्षिण भारत में क्षात्र चेतना की परम्परा के एक और महानतम उदाहरण हिंदू धर्म के ध्वजवाहक शिवा-महाराज अर्थात छत्रपति श...
अप्रतिम योद्धा महाराजा रणजीत सिंह सिखों के योद्धाओं की परम्परा में महाराजा रणजीत सिंह का नाम भी श्रेष्ठतम योद्धाओं में लिया जाता है। महाराजा रणजीत सिंह ने ही उ...
उन्हे इस्लाम धर्म स्वीकरा करने के लिए बाध्य किया जाने लगा। उस समय वहाँ उपस्थित काजी ने कहा कि गोविंद सिंह चूंकि हमारा शत्रु है इसके लिए इन बच्चों को सजा न दी जा...
गुरु तेग बहादुर का शौर्य औरंगजेब ने कश्मीर पर आक्रमण कर वहां के सभी पंडितों की हत्या करने का प्रयास किया, मृत्यु के भय से उन्होंने कश्मीर नरेश को अपना राज्य सम...
प्रतिष्ठा से वंचित सम्राट – हेमचन्द्र विक्रमादित्य भारत के लम्बे इतिहास में कुछ युद्ध बडे निर्णायक सिद्ध हुई। पानीपत की तीनो लड़ाइयां इस दृष्टि से महत्वपूर्ण र...
अजेय सम्राट : छत्रसाल अतुलनीय शौर्य का एक और उदाहरण बुंदेलखंड का सम्राट छत्रसाल है। इसके कारण औरंगजेब तक भयभीत था। बुंदेलखंड का नाम उस क्षेत्र की देवी विंध्यवा...
राणा प्रतापसिंह की सफलता और उपलब्धियॉ उसकी नीतियों की योग्यता और प्रभाव को सिद्ध करती है। अपने बाहर वर्षों के सतत प्रयासों के पश्चात भी अकबर उससे कुछ भी छीन सकन...
महाराणा प्रतापसिंह : एक अद्वितीय योद्धा महाराणा प्रतापसिंह (महाराणा प्रताप) भारत के क्षात्र भाव के सबसे अधिक चमकीले हीरे है। वे उदयसिंह के तेईस (23) बच्चो में...
मेवाड़ के महा क्षत्रिय राजपूतों में संभवतः मेवाड़ का राजवंश श्रेष्ठतम है। मेवाड़ का केंद्र चित्रकूट (चित्तौड़) है। ऐसा प्रतीत होता है मानों एक बहुत बडे समतल भू...
मध्य भारतीय मुस्लिम साम्राज्य जैसे अहमदनगर, बरार, बीदर, गोलकुण्डा, बीजापुर, गुलबर्गा आदि सतत रूप से लड रहे थे जिसमें यदाकदा विजयनगर का राजा किसी भी एक मुस्लिम र...
भारतीय विद्या भवन द्वारा इतिहास के अनेक खण्ड ग्रंथ भारतीय इतिहास के सत्य को दर्शाने हेतु प्रकाशित हुए है। आर. सी. मजूमदार लिखते है - सम्पादक का यह प्र...
केरल के अधिकांश राजा या तो ब्राह्मण थे या क्षत्रिय थे। यद्यपि राजा सामुद्री, वास्को डी गामा की गतिविधियों और उसके आचरण के प्रति संदेह करते हुए चिंताग्रस्त हो गय...
अनेक अवसरों पर जब मुस्लिम सेना का पाशविक कृत्य अपने चरम पर था, भारत भूमि में साहसी वीर निरंतर रूप से होते रहे। एक मुस्लिम लेखाकार अल इद्रिसी कहता है – “भारतीय...
जिस समय सीमाक्षेत्र पर गुर्जर प्रतिहार के लोग, अरब देश के व्यापारियों द्वारा किये जा रहे अन्याय के विरुद्ध स्थानीय व्यापारियों के हित में अनवरत रूप से लड रहे थे...
महाभारत में दुर्योधन वध के पूर्व श्री कृष्ण युधिष्ठिर को समझाते है कि युद्ध में कपटी, चालाक तथा दुष्ट दुश्मन को उसी के तौर तरीकों से हराना आवश्यक हो जाता है[1]।...
जब तक भोज जीवित रहा, गजनी कुछ विशेष प्राप्त कर पाने में सफल नहीं हो सका किंतु भोज को अनेक सनातन धर्मियों ने ही मिलकर युद्ध भूमि में मार दिया। महमूद गजनी के बार...
जो महिलाए उनके लिए अप्राप्य थी जैसे कि रानी रूपमती, रानी जयवंती, रानी दुर्गावती तथा अन्य भी उन्हे बादशाहों की अतृप्त वासना की आग में जलना पड़ा। इस प्रकार के अने...
संघर्ष-काल भारतवर्ष पर पहले इस्लामिक आक्रमणों का दौर अब हम विशेष रूप से पश्चिम एशिया के मुस्लिम सैन्य बलों द्वारा भारत पर किये गये पाशविक आक्रमणों की प्रकृति...
भारत में हम ऐसे अनेक साम्राज्यो के उदाहरण पाते है कि एक क्षेत्र के साम्राज्य का आधिपत्य किसी अन्य क्षेत्र पर स्थापित हुआ हो। जैसे नेपाल और मिथिला के शासक सेन वं...
रेड्डियों का विजय घोष तथा गजपतियों का सामर्थ्य प्रतापरुद्र के अवसान के उपरांत आंध्र में रेड्डी राजाओं ने मुस्लिम आक्रमणों का सामना किया था। इनमें वेमारेड्डी तथ...
प्राचीन आंध्र में हमें इस प्रकार के क्षात्र भाव के दर्शन नहीं होते हैं। वहां के प्रथम शासक सातवाहन लोग थे किंतु उन्होंने पूरे दक्षिण भारत पर शासन किया था। आंध्र...
चोल लोगों पर यह बड़ा आरोप लगाया जाता है कि वे वैष्णव विरोधी थे। इसको प्रमाणित करने के कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। राजराज तथा राजेन्द्र चोल दोनों ने ही अनेक विष्णु...
पाप्ड्या, चोल एवं चेर चोल लोगों का शासन तमिलनाडु के पूर्वी तट पर था, पाण्ड्याओं का दक्षिण भारत के मध्य क्षेत्र में तथा चेर लोगों ने पश्चिमी तट पर शासन किया । इ...
कंपण द्वितीय का उत्तराधिकारी देवराय प्रथम था और उसका पुत्र विख्यात देवराय द्वितीय अथवा प्रौढ़देवराय था जो प्रौढप्रतापी’ की उपाधि से सम्मानित था। उसने बचे हुए दु...
होयसल विष्णुवर्धन क्षात्र परम्परा के अन्य शिखर होयसल सम्राट बिट्टीदेव अर्थात विष्णुवर्धन हुए हैं। उसने अपने साम्राज्य को तिरुचिरापल्ली से कृष्णा नदी तक विस्तार...
राष्ट्रकूट साम्राज्य का हरा भरा विस्तार कन्नड लोगों के हृदय में बसने वाला एक प्रसिद्ध नाम नृपतुंग का है। श्री विजय के साथ अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘कविराजमार्ग’ की...
चालुक्य विक्रमादित्य का उत्कृष्ट शासन कर्नाटक के प्रमुखतम सम्राटों में कल्याण चालुक्य राज सम्राट विक्रमादित्य षष्टम का नाम स्मरणीय है। वह सोमेश्वर प्रथम का पुत...
हमारी दुर्बलताएँ मुख्य रूप से हमारी दुर्बलता के दो पक्ष रहे है :- प्रथम तो यह कि हमने अपने शत्रुओं को हमारे द्वार तक आने दिया तथा दूसरा यह कि हमने युद्ध के संब...
ह्वेनसांग के अनुसार शशांक ने गया में स्थित बोधि वृक्ष को कटवा दिया था तथा पास के मंदिर से बुद्ध की प्रतिमा को हटाने का आदेश दिया था। किंतु इस संबंध में आर.सी. म...
शौर्य काल पिछले कुछ समय में लिखे गये भारतीय इतिहास में अनेक घटनाओं तथा प्रकरणों को अवांछित रूप से सम्मान प्रदान करते हुए महत्वपूर्ण बतलाया गया है। ऐसे अनेक विव...
अन्य राजपूत राजवंश गुर्जर चौलुक या चालुक्य वंश को सामान्य रुप से सोलंकी वंश के नाम स जाना जाता है। भीमदेव प्रथम (सन् 1022-64) अत्यधिक प्रसिद्ध था किंतु जब महमू...
चन्देलों की उपलब्धियां कालिंजर को राजधानी बनाकर बुंदेलखंड पर शासन करने वाले चंदेल मूलतः शूद्र थे। वे अपने शौर्य के कारण क्षत्रिय बन गये। चंदेलों में हर्षपुत्र...
आज हमें पाल राजवंश द्वारा निर्मित कोई भी बडा पूजा केन्द्र अथवा देवालय दिखाई नहीं देता इसका एकमात्र कारण बख्तियार खिलजी तथा उसी के समान अन्य मुस्लिम आक्रांताओं क...
अरब के यात्री सुलेमान अत्ताज़िर और अल मसूदी ने भोज की सेना की सदा युद्ध के लिए तैयार रहने वाले गुणों की तथा उसके राज्य की समृद्धि और बाहुल्य की मुक्तकंठ से प्रश...
योद्धा राजवंशों का साहसिक प्रतिरोधक युग यदि कोई साम्राज्य 220-250 वर्षों तक बना रह सकता है तो उसे एक सफल साम्राज्य कहा जा सकता है। आज के भारत के चार प्रदेशों क...
तीन बार कुब्ज विष्णुवर्धन ने अपने भाई पुलकेशी के विरुद्ध विद्रोह किया और तीनों ही बार पुलकेशी ने उसे क्षमा कर दिया। न तो वह अपने दुष्ट काका के प्रति आवश्यक कठोर...
समुद्री घाट क्षेत्र के अनेक शत्रुओं को पुलकेशी ने हराया। उसने अनेक राष्ट्रकूटों पर भी विजय प्राप्त की, उसने सातवाहनों को समाप्त किया, उसने पल्लव वंशी महेन्द्रवर...
हर दृष्टि से सनातन धर्म, बौद्ध धर्म की तुलना में श्रेष्ठ है। यह सनातन धर्म की श्रेष्ठता का ही प्रतिफल है कि उससे बौद्ध धर्म का जन्म हुआ किंतु बौद्ध धर्म में अपन...
भारतीय सम्राटों की साहित्यिक विद्वत्ता सम्राट शिलादित्य हर्षवर्धन के स्वयं के लेखन से यह ज्ञात होता है कि अपने जीवन के उत्तरार्ध के वर्षों में उसमें बौद्ध धर्म...
विदेशी यात्रियों के पूर्वाग्रह चीनी यात्री ह्वेन त्सांग, जिसे हर्षवर्धन का बड़ा सहयोग प्राप्त हुआ था, ने अपनी यात्रा गाथा में सम्राट की अत्यधिक प्रशंसा की है।...
साम्राज्यों का युग गुप्तकाल के अंतिम समय मे गंगा किनारे स्थानेश्वार (थानेश्वर) का उदय हुआ | यह कुरुक्षेत्र में अम्बाला तथा दिल्ली के मध्य स्थित है | यहाँ हर्षव...
कलिंग देश का सम्राट खारवेल यद्यपि जैन धर्म का अनुयायी था जो अहिंसा की परम्परा व विचारों के लिए विश्वविख्यात है, किंतु वह क्षात्र के सिद्धान्त को मानने वाला महान...
स्कंदगुप्त का सामर्थ्य कुमारगुप्त के पश्चात उसके पुत्र स्कंदगुप्त ने हूणों से युद्ध कर उन्हे हराया। के.एम.मुंशी के अनुसार चौथी शताब्दी के मध्यकाल में मानव इतिह...
गुप्तकाल का वास्तुशिल्प तथा मूर्तिकला वास्तु शिल्प तथा मूर्तिकला के क्षेत्र में गुप्तकाल में असाधारण कार्य हुआ था। आज भी गुप्तकालीन उपहार के रुप में अनेक गुफा...
यदि नवीन तथा नवीनतम शस्त्रों को विकसित किया जाता रहा जिससे सततरुप से शस्त्र भण्डार बढ़ता रहे तो लम्बे समय तक शांति-स्थापना की संभावना कहॉ रह जाती है ? सभी लोगों...
यही विशेषता हम वाल्मीकि तथा व्यास में भि देखते है – राम ने जिस तरह वाली को मारा था अथवा सीता का त्याग किया था, उसके बाद भी वे सम्मान के प्रतीक बने,रणभूमी में घट...
गुप्तकाल मे सनातनधर्म का पुनर्जागरण प्राचीन भारतियों ने दूर दूर तक समुद्री यात्राए की थी | उनके अनेक देशों से व्यापारिक संबन्ध थे | केवल व्यापारियों तथा व्यवसा...
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने जो भी निर्णय लिए तथा जो भी संबंध स्थापित किये थे वे सब शास्त्रानुसार तथा परम्परानुगत प्रथा द्वारा मान्य थे। उसके शासन काल में सनातन...
अपने छोटे भाई की सफलता के कारण रामगुप्त में ईर्ष्याभाव बढ़ने लगता है और वह अपने भाई को विभिन्न तरीकों से क्रूरता पूर्ण व्यवहार करता है। उसने अपने भाई की हत्या क...
यह जानते ही विरूढक आपे से बाहर हो गया। ‘इन लोगो ने मेरे पिता को भी धोखा दिया और अब मेरा भी अपमान कर रहे है’ यह कहते हुए उसने संपूर्ण शाक्य समुदाय का ही नाश कर द...
अतः उस समय क्या किया जा सकता था जब विदेशी आक्रांताओ ने युद्ध के सारे नैतिक मूल्यों (अर्थात् धर्म) की परवाह किये बिना हिंसात्मक आक्रमण किये। इस्लाम के रक्त रंजित...
कालिदास ने अश्वघोष के कथ्य का रचनात्मक तथा सकारात्मक सुधारण किया था। समुद्रगुप्त ने भी यही सुधारण अशोक के संबंध में किया। हर किसी को इसे रचनात्मक सुधारण के रुप...
जब नाग वंश के लोग अत्यंत शक्ति शाली हो गये थे तथा सनातन धर्म के लिए संकट उपस्थित कर रहे थे तो समुद्रगुप्त ने उन्हे ठण्ड़ा कर सौम्य प्रत्यायन द्वारा प्रभावित करत...
अनेक विद्वानो के निर्णायक लेखन से युक्त, अनेक भाग वाले विशाल ग्रंथ ‘द हिस्ट्री एण्ड कल्चर ऑफ इंडिन पिपल’ में गुप्तकाल का वास्तविक तथा सुस्पष्ट इतिहास दिया गया ह...
क्षात्र की आवश्यकता समुचित रुप से युद्ध तथा शांति, दोनो समय में होती है। इसके अनेक उदाहरण हम अपने देश के भूतकाल में देख सकते है। इसी क्षात्र के दर्शन महाभारत का...
गुप्त वंश का स्वर्णिम युग यह पहले ही उल्लेख किया जा चुका है कि क्षत्रियता के गुण में आनुवांशिकता का अधिक महत्त्व नहीं है। तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी इतिहासकारो...
भारतीय क्षात्र परम्परा में हम मुख्य रुप से सभी संप्रदायों के सुन्दर समावेशन के दर्शन करते है । संप्रदायवाद से ऊपर उठना ही सनातन धर्म की आन्तरिक रुपरेखा है। इस व...
यह स्थिति सनातन धर्म में चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य तथा कुमारगुप्त के समय तक भी बनी रही। ऐतिहासिक ग्रंथों तथा अभिलेखों से ज्ञात होता है कि ईसा की पांचवी तथा छठी श...
उस समय में वेदों का अनुसरण करने वालों ने भी बौद्ध धर्म का बहिष्कार नहीं किया था। सातवाहनों ने न केवल सांची स्तूप के द्वारों का निर्माण करवाया अपितु अमरावती ने ए...
भगवान बुद्ध के जीवन की इस घटना को देखें। एक दिन बुद्ध के विश्वास पात्र तथा संबंधी (गृहस्थजीवनका) विख्यात आनन्द अपने साथ यशोधरा (बुद्ध के पूर्वाश्रम मे की पत्नी)...
ऐसी ही घटना को आज हम गांधी-नेहरु काल में देख रहे हैं – यदि नेहरु जैसा व्यक्ति गांधी का उत्तराधिकारी हो सकता है तो यह गांधी के सिद्धांतों की वास्तविकता को दर्शात...
अशोक की अहिंसा नीति का आकलन इत् सिंग जैसे चीनी यात्री के अभिलेखानुसार अशोक एक सन्यासी तथा बौद्ध भिक्षु था। उनके कथनानुसार उन्होने ऐसी प्रतिमा के दर्शन भी किये...
बुद्ध द्वारा प्रतिपादित सातगुण – सप्तशील लिच्छवियों के प्रश्न के प्रति उत्तर में बुद्ध ने उन्हे सात सिद्धांतों का उपदेश दिया। इस विषय पर महान राष्ट्रप्रेमी और...
दुर्भाग्य से अशोक को कृष्ण के समान कोई मार्गदर्शक नहीं मिला और नहीं उसने बुद्ध के समान सत्य को पूर्ण समर्पित जीवन जीया। वह क्षात्र के पथ से भटक गया। मेरी दृष्टि...
चाणक्य यंहा दो शब्दों का प्रयोग करता है – ‘अपवाहयंति’ और ‘कर्षयंति’ अर्थात् ‘पूरीतरह से भक्षण करना’ और ‘उत्पीडित’ करना। चाणक्य का कहना है कि यदि हम इन कठोर विप...
चाणक्य की असाधारण प्रतिभा चाणक्य तथा चन्द्रगुप्त समान महानता और मनोवृत्ति वाले व्यक्ति थे। इसका साक्षात प्रमाण यह है कि अनेक वर्षों तक एक बृहत्साम्राज्य का उसक...
अर्थशास्त्र में क्षात्र चेतना चाणक्य ने गणतांत्रिक व्यवस्था में जो भी श्रेष्ठ था उसे अपनाते हुए साम्राज्य की अश्वमेध की अवधारणा को भी पुनः लौटाया। इन दोनों का...
सनातन धर्म अगणित समस्याओं के श्रेष्ठ निदानों का अनमोल खजाना है। उदाहरण के लिए ‘संकल्प’ पर विचार करें जिसे हम अपने दैनिक पूजा पद्धति की एक क्रिया के रुप में करते...
चाणक्य कोई धर्मान्ध व्यक्ति नहीं था। वह स्वयं आसानी से सिंहासन पर बैठ सकता था जैसा कि उन दिनों ब्राह्मणों का राजा बनना प्रचलन में था। मौर्य साम्राज्य के पतन के...
जितनी स्वतंत्रता की आवश्यकता है उतनी ही आवश्यकता हमें संयम और आत्मानुशासन की भी है। जब हम नियंत्रणों का सम्मान करना जान लेंगे तब ही हमे अधिकार और सुविधाएँ प्राप...
यत्र तत्र इस बात के भी संदर्भ मिलते हैं कि ग्रीक महिलाओं को भारत में काम पर रखा जाता था। श्यामिलक की पुस्तक ‘पाद-ताडितक-भाण’ में कुसुमपुरा में रहने वाले ग्रीक व...
बुद्ध के समय के सोलह बडे राज्य निम्नानुसार थेः- अंग मगध काशी कोसल वृजिगण (वज्जीगण)[1] मल्लगण[2] चेदी[3] वत्स (बच्च)[4] कुरु पांचाल मत्स्...
साम्राज्य-काल वेदों, इतिहास तथा पुराणों से अब हम तथा कथित ऐतिहासिक काल पर आते हैं। वैसे भी प्राचीन साहित्य तथा लिपिबद्ध इतिहास के मध्य कोई स्पष्ट विभाजन रेखा न...
इन सबमें अद्धितीय भार्गववंशी परशुराम थे। वे ब्राह्म-क्षात्र समन्वय के श्रेष्ठ प्रतीक है। परशुराम द्वारा दुष्ट क्षत्रियों की सुव्यवस्थित विनाश लीला का वर्णन पुरा...
कालिदास की क्षात्र चेतना कवि शिरोमणि महाकवि कालिदास ने अपनी सर्वश्रेष्ठ कृति ‘रघुवंश’ में यह पूर्णतः स्पष्ट किया है कि किस प्रकार एक साम्राज्य में क्षात्र को प...
इसी शौर्य भाव को हम ऋषि विश्वामित्र में भी देखते हैं जिन्होने राम को क्षात्र दीक्षा प्रदान की थी। एक महर्षि बनने से पूर्व विश्वामित्र ने ब्राह्म के साथ संघर्ष क...
पुराणों के लक्षणों को दर्शाने वाला प्रसिद्ध श्लोक जो पुराणों की पांच मुख्य विषयवस्तु का वर्णन करता हैः- सर्ग - मुख्य रचन प्रतिसर्ग - रचना का व...
क्षात्र की भारतीय परम्परा में राजधर्म के दृष्टिकोण को समझने हेतु यंहा हमारे ग्रंथो से धर्म तथा अर्थ संबंधी कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं – अत्रिस्मृति तथा विष्णु धर्म...
शुक्ल यजुर्वेद का एक अन्य श्लोक निम्नानुसार है – मेरे कंधों में बल है, मेरी बुद्धि में बल है मेरी बांहो में, मेरे साहस में कर्म भरा है एक हाथ से कार्य...
इन्द्र : क्षात्र का प्रमुख प्रतीक वेदो में इन्द्र को पुरन्दर कहा गया हा अर्थात् शत्रुओं के पुरों का जिसने नाश किया है। यंहा ‘पुर’ शब्द, शत्रुओं के नगरों और किल...
जब कभी हम क्षात्र गुण की अनदेखी करते है तब कुछ ऐसे तथा कथित शांतिवादी लोग होते हैं जो इसे हिंसा से जोड़ कर इसे निर्दयी तथा अमानवीय समझते हैं। यह एक त्रुटियुक्त्...
वैदिक काल पौराणिक आख्यान है[1] कि धननंद के शासन के साथ नदंसाम्राज्य के अंत के उपरांत इस धरा पर कोई क्षत्रिय नही रहा[2]। यह कहा गया कि जन्म से कोई क्षत्रिय नही...
श्री कृष्ण श्री कृष्ण को ब्राह्म-क्षात्र समन्वय का सर्वोत्त्कृष्ठ अनुकरणीय प्रतीक माना जा सकता है। उनके पूर्व प्रत्येक आदर्श का प्रतिनिधित्त्व भिन्न भिन्न व्यक...
ब्राह्म और क्षात्र का समन्वय वैदिक काल से ही भारतीय परम्परा में ब्राह्म (ज्ञानभाव) एवं क्षात्र (शौर्यभाव) के समन्वय को एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त है। वैदिक सा...
युद्दभूमि में बडे बडे योद्दाओं द्वारा प्राण त्यागने वाले वीरों को प्राप्त ‘स्वर्गलोक’ की अवधारणा में सनातनधर्म और सेमेटिक धर्मो के मध्य मूलभूत अन्तर है। उदाहरणा...
अंग्रेजी अनुवाद की भूमिका अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण भारत सदैव से व्यापक स्तर पर बाहुल्यता की भूमि रहा है। विश्व भर के अनेक लोग भारत को श्रद्दा तथा आद...