Topic Archive

History

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 22
History Mar 27, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 22

चाणक्य यंहा दो शब्दों का प्रयोग करता है – ‘अपवाहयंति’ और ‘कर्षयंति’ अर्थात् ‘पूरीतरह से भक्षण करना’ और ‘उत्पीडित’ करना। चाणक्य का कहना है कि यदि हम इन कठोर विप...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela
भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 21
History Mar 20, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 21

चाणक्य की असाधारण प्रतिभा चाणक्य तथा चन्द्रगुप्त समान महानता और मनोवृत्ति वाले व्यक्ति थे। इसका साक्षात प्रमाण यह है कि अनेक वर्षों तक एक बृहत्साम्राज्य का उसक...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela
भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 20
History Mar 13, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 20

अर्थशास्त्र में क्षात्र चेतना चाणक्य ने गणतांत्रिक व्यवस्था में जो भी श्रेष्ठ था उसे अपनाते हुए साम्राज्य की अश्वमेध की अवधारणा को भी पुनः लौटाया। इन दोनों का...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela
भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 19
History Mar 06, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 19

सनातन धर्म अगणित समस्याओं के श्रेष्ठ निदानों का अनमोल खजाना है। उदाहरण के लिए ‘संकल्प’ पर विचार करें जिसे हम अपने दैनिक पूजा पद्धति की एक क्रिया के रुप में करते...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela
भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 18
History Feb 28, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 18

चाणक्य कोई धर्मान्ध व्यक्ति नहीं था। वह स्वयं आसानी से सिंहासन पर बैठ सकता था जैसा कि उन दिनों ब्राह्मणों का राजा बनना प्रचलन में था। मौर्य साम्राज्य के पतन के...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela
भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 17
History Feb 21, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 17

जितनी स्वतंत्रता की आवश्यकता है उतनी ही आवश्यकता हमें संयम और आत्मानुशासन की भी है। जब हम नियंत्रणों का सम्मान करना जान लेंगे तब ही हमे अधिकार और सुविधाएँ प्राप...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela
भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 16
History Feb 14, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 16

यत्र तत्र इस बात के भी संदर्भ मिलते हैं कि ग्रीक महिलाओं को भारत में काम पर रखा जाता था। श्यामिलक की पुस्तक ‘पाद-ताडितक-भाण’ में कुसुमपुरा में रहने वाले ग्रीक व...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela
भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 15
History Feb 07, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 15

बुद्ध के समय के सोलह बडे राज्य निम्नानुसार थेः- अंग मगध काशी कोसल वृजिगण (वज्जीगण)[1] मल्लगण[2] चेदी[3] वत्स (बच्च)[4] कुरु पांचाल मत्स्...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela
भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 14
History Jan 31, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 14

साम्राज्य-काल वेदों, इतिहास तथा पुराणों से अब हम तथा कथित ऐतिहासिक काल पर आते हैं। वैसे भी प्राचीन साहित्य तथा लिपिबद्ध इतिहास के मध्य कोई स्पष्ट विभाजन रेखा न...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela
ದೇಶೀಯ ಸಂಸ್ಥಾನಗಳನ್ನು ಕುರಿತ ಡಿ.ವಿ.ಜಿ. ಅವರ ಚಿಂತನೆಗಳು - 6
History Jan 29, 2024

ದೇಶೀಯ ಸಂಸ್ಥಾನಗಳನ್ನು ಕುರಿತ ಡಿ.ವಿ.ಜಿ. ಅವರ ಚಿಂತನೆಗಳು - 6

ನರೇಂದ್ರ ಮಂಡಲದ ಅವಾಂತರಗಳು ಇದರ ಇನ್ನೊಂದು ಪಾರ್ಶ್ವವನ್ನು ಡಿ.ವಿ.ಜಿ. ಅವರ Chamber of Princes (ನರೇಂದ್ರ ಮಂಡಳ) ಕುರಿತಾದ ಸಮಗ್ರ ಲೇಖನಗಳಲ್ಲಿ ಕಾಣಬಹುದು. ಅದರ ತಾತ್ಪರ್ಯವನ್ನು ಈ ರೀತಿ...

Sandeep Balakrishna
भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 13
History Jan 29, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 13

इन सबमें अद्धितीय भार्गववंशी परशुराम थे। वे ब्राह्म-क्षात्र समन्वय के श्रेष्ठ प्रतीक है। परशुराम द्वारा दुष्ट क्षत्रियों की सुव्यवस्थित विनाश लीला का वर्णन पुरा...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela
भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 12
History Jan 24, 2024

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 12

कालिदास की क्षात्र चेतना कवि शिरोमणि महाकवि कालिदास ने अपनी सर्वश्रेष्ठ कृति ‘रघुवंश’ में यह पूर्णतः स्पष्ट किया है कि किस प्रकार एक साम्राज्य में क्षात्र को प...

Shatavadhani Dr. R. Ganesh | Trans: Prof D S Vaghela