भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 69
संघर्ष-काल भारतवर्ष पर पहले इस्लामिक आक्रमणों का दौर अब हम विशेष रूप से पश्चिम एशिया के मुस्लिम सैन्य बलों द्वारा भारत पर किये गये पाशविक आक्रमणों की प्रकृति...
संघर्ष-काल भारतवर्ष पर पहले इस्लामिक आक्रमणों का दौर अब हम विशेष रूप से पश्चिम एशिया के मुस्लिम सैन्य बलों द्वारा भारत पर किये गये पाशविक आक्रमणों की प्रकृति...
भारत में हम ऐसे अनेक साम्राज्यो के उदाहरण पाते है कि एक क्षेत्र के साम्राज्य का आधिपत्य किसी अन्य क्षेत्र पर स्थापित हुआ हो। जैसे नेपाल और मिथिला के शासक सेन वं...
रेड्डियों का विजय घोष तथा गजपतियों का सामर्थ्य प्रतापरुद्र के अवसान के उपरांत आंध्र में रेड्डी राजाओं ने मुस्लिम आक्रमणों का सामना किया था। इनमें वेमारेड्डी तथ...
The Yajnadevam paper is a recent research publication that presents a novel and pioneer approach to deciphering the Sindhu-Sarasvati Valley Script (SSVS), which...
प्राचीन आंध्र में हमें इस प्रकार के क्षात्र भाव के दर्शन नहीं होते हैं। वहां के प्रथम शासक सातवाहन लोग थे किंतु उन्होंने पूरे दक्षिण भारत पर शासन किया था। आंध्र...
चोल लोगों पर यह बड़ा आरोप लगाया जाता है कि वे वैष्णव विरोधी थे। इसको प्रमाणित करने के कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। राजराज तथा राजेन्द्र चोल दोनों ने ही अनेक विष्णु...
पाप्ड्या, चोल एवं चेर चोल लोगों का शासन तमिलनाडु के पूर्वी तट पर था, पाण्ड्याओं का दक्षिण भारत के मध्य क्षेत्र में तथा चेर लोगों ने पश्चिमी तट पर शासन किया । इ...
कंपण द्वितीय का उत्तराधिकारी देवराय प्रथम था और उसका पुत्र विख्यात देवराय द्वितीय अथवा प्रौढ़देवराय था जो प्रौढप्रतापी’ की उपाधि से सम्मानित था। उसने बचे हुए दु...
होयसल विष्णुवर्धन क्षात्र परम्परा के अन्य शिखर होयसल सम्राट बिट्टीदेव अर्थात विष्णुवर्धन हुए हैं। उसने अपने साम्राज्य को तिरुचिरापल्ली से कृष्णा नदी तक विस्तार...
राष्ट्रकूट साम्राज्य का हरा भरा विस्तार कन्नड लोगों के हृदय में बसने वाला एक प्रसिद्ध नाम नृपतुंग का है। श्री विजय के साथ अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘कविराजमार्ग’ की...
चालुक्य विक्रमादित्य का उत्कृष्ट शासन कर्नाटक के प्रमुखतम सम्राटों में कल्याण चालुक्य राज सम्राट विक्रमादित्य षष्टम का नाम स्मरणीय है। वह सोमेश्वर प्रथम का पुत...
हमारी दुर्बलताएँ मुख्य रूप से हमारी दुर्बलता के दो पक्ष रहे है :- प्रथम तो यह कि हमने अपने शत्रुओं को हमारे द्वार तक आने दिया तथा दूसरा यह कि हमने युद्ध के संब...